
आर्थिक तंगी के कारण सुनीता को स्कूल छोड़ना पड़ा था। पाठशाला कार्यक्रम की टीम ने उसके परिवार को समझाया, प्रवेश करवाया और निःशुल्क किताबें व कोचिंग दी। आज सुनीता आठवीं कक्षा में प्रथम स्थान पर है और डॉक्टर बनने का सपना देखती है।
सांगानेर

आर्थिक तंगी के कारण सुनीता को स्कूल छोड़ना पड़ा था। पाठशाला कार्यक्रम की टीम ने उसके परिवार को समझाया, प्रवेश करवाया और निःशुल्क किताबें व कोचिंग दी। आज सुनीता आठवीं कक्षा में प्रथम स्थान पर है और डॉक्टर बनने का सपना देखती है।